मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
मुझसे संपर्क साधना बहुत आसान है... ab8oct@gmail.com,
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पर मेल कर सकते है,
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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

ब्रेकिंग न्यूज़.... अविनाश वाचस्पति जी के बारे में बहुत बड़ा खुलासा...


कल अविनाश वाचस्पति सर का फ़ोन आया था... कॉल करने के लिए मैंने ही कहा था... बातों बातों में एक राज की बात खुल गयी... अविनाश सर सबको बता रहा हूँ... अब आप गुस्सा होइए या न होइए कोई फर्क नहीं पड़ता... मैं तो बता रहा हूँ... तो खुलासा ये है कि अविनाश सर के घर पर टी वी नहीं है... इतनी सारी घटनाओं को दुर्घटना बना देते है और घर में एक टी वी नहीं है???...

अविनाश सर मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी... कितने चैनल वालों का आपने दिल तोड़ दिया... आप ही बताइए सब आपकी तरह टी वी रखना बंद कर दे तो कितने टी वी बनाने वाले अपनी फैक्टरी में लगाने के लिए ताला बनाने लगेंगे... कितने ही चैनल बंद हो जायेंगे... क्यों देश की अर्थ-व्यवस्था पर चोट कर रहे है... बेरोजगारी बढ़ाने में सहयोग कर रहे है... उनके भी बीवी-बच्चे है (महिलाओं के पति-बच्चे है)....

अविनाश सर कल ही खरीद डालिए... न देखिएगा पर खरीद लीजिये... बोर हो जाइये तो मैं हूँ न... खुद आके ले जाऊंगा आपके घर से...

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

सच क्या है???

आज फिर उसने कहा वो खुबसूरत नहीं है.... क्या है ये खूबसूरती... ये आखिर बला क्या है... मुझे तो आज तक समझ नहीं आया... किसी को आता है समझ में बताओ यार... मेरी मदद करो... मैंने तो हर लड़की से उसकी तुलना कर के देख ली... ऐश्वर्या (लोग कहते है वो बहुत सुन्दर है, मुझे भी अच्छी लगती है) से भी तुलना कर के देखा... दोनों को एक ही नाक, एक ही मुंह है.... दो कान है, दो आँखें... दो गाल दोनों को है... अब और ज्यादा शारीरिक तुलना नहीं करूँगा... मुस्कुराते हुए दोनों अच्छी लगती है... तो आखिर ऐसा क्या है कि वो खुद को खुबसूरत नहीं मानती??? पूछा तो कहती है जो सच है सच है... अब यारों आप लोग बताओगे सच क्या है???

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

स्कोर क्या हुआ है अभी??? <<< सिर्फ मैं जागूँगा... Only I get up...>>>


आज मैं कोई कविता या फिर अपनी कोई बात कहने नहीं आया हूँ.... आज मैं कुछ अलग कहना चाहता हूँ.... कुछ ऐसा जो सबका हो.... कुछ ऐसा जिससे सबका फायदा हो.... हम ब्लॉग लिखते है, फेसबुक-ऑरकुट पर दोस्त बनाते है.... पर हम एक काम नहीं करते.... हम कभी उसकी बात नहीं करते जो शायद हमारे जीवन में सबसे ज्यादा जरूरी होना चाहिए... हम उसके बारे में सोंचते भी नहीं... क्योंकि हमें लगता है कि हमें इससे क्या... पर दोस्तों यकीन मानो मेरा वो सबसे ज्यादा प्रभाव हम पर डालता है... हम ही है जिसके बदौलत वो फलफूल रहा है, जिसकी बदौलत वो जिन्दा है... वो जिन्दा बिलकुल किसी जोंक की तरह... हमारे शरीर पर रहकर हमारा ही खून चूस रहा है... मैं बात कर रहा हूँ बेईमानी की... बेईमानी एक ऐसा शब्द जिससे कई और शब्दों का निर्माण हो गया है... भ्रष्टाचार, चोरी, डकैती, घूसखोरी, ठगी, "नेतागिरी"... ये सब इसी बेईमानी की उपज है...

आज हमारे चारों ओर इन्ही का बोलबाला है... अगर मैं गलत नहीं हूँ तो हमारे अन्दर भी यही निवास करता है आज... हम दोष देना तो बखूबी जानते है पर कुछ करने की बात हो तो ब्लॉग या फेसबुक है न... ५ अप्रैल को अन्ना साहब ने एक आन्दोलन छेड़ा... सबने खूब हंगामा मचाया... टीवी, रेडिओ, न्यूज़-पेपर, ऑरकुट, फेसबुक, ब्लॉग, मेल्स, एस एम् एस... सब पर उसी की चर्चा... लग रहा था जैसे भारत भ्रष्टाचार मुक्त हो कर ही रहेगा... लगा जैसे लोग अब जाग गए है... लगा जैसे इस देश में क्रिकेट और फिल्म से ऊपर कुछ आ गया है... लगा जैसे युवाओं के लिए शराब, सिगरेट और लड़कियों से जरूरी कुछ हो गया है... लगा जैसे युवतियों के लिए फैशन, कपडे, मेकप से बड़ा कुछ हो गया है... लगा इस देश में ईजिप्त जैसी एक क्रान्ति होगी... पर सब ख़त्म... एक फूँक से जैसे बुलबुला बना था एक फूँक से वैसे ही फूट भी गया... किसी ने फेसबुक पर मुझसे कहा था... "अभी बहुत लड़ना बाकी है..." मेरा जवाब था उनके लिए... "आई पी एल ख़त्म होने दीजिये..." ये जवाब मेरा एक व्यंग्य था... एक ऐसा व्यंग्य जो बहुत बड़ा सच है...

कहीं भी नजर घुमा कर देखिये हर जगह बेईमानी नजर आएगी... पर हम कुछ नहीं करते... कब तक हम सोये रहेंगे... या सोये सोये ही मर जायेंगे... हम अपने आने वाली पीढ़ी को क्या दे रहे है... हर पीढ़ी अपने से पहले वाली पीढ़ी को दोष देती है... हम भी ऐसा करते है... पर हम खुद क्या कर रहे है... हम समाज का कैसा निर्माण कर रहे है...क्या बना रहे है हम... किस अंधी दौड़ में भाग रहे है... आज हमारी ऐसी हालात हो चुकी है कि हम कहीं के नहीं है... एक कहावत है "न घर के न घाट के"... हम भी बिलकुल ऐसे ही है... अपनी संस्कृति हमने दूसरों के लिए छोड़ दी... दूसरी संस्कृति हम अपना नहीं सके... अपना सकते भी नहीं... हम किसी के अपने हो भी नहीं सकते... जो अपनों का अपना नहीं हुआ... वो किसी और का अपना हो भी कैसे सकता है... जो अपने घर को बचा नहीं सकता, जो अपना घर नहीं बना सकता वो कैसे सोंच सकता है कि दुसरे उसे अपने घर में पनाह देंगे... मैं भी शायद ऐसा ही करता होऊंगा... पर करना नहीं चाहता... 

एक वाकया याद आ रहा है मुझे... हमारे मोहल्ले का ट्रांसफार्मर जल गया था... एक हफ्ता बिता, फिर दो फिर तीन... पूरा महिना बीत गया पर ठीक करने कोई नहीं आया... एक दो लोगों ने बिजली विभाग को शिकायत भी की पर कोई फायदा नहीं... ऑफिसर का कहना था कि नया ट्रांसफोर्मर लगाना पड़ेगा, ट्रांसफार्मर तो है पर विभाग के पास अपने बिजली मिस्त्री नहीं है, ट्रांसफार्मर ले जाने के लिए गाडी नहीं है, चढाने के लिए मजदूर और क्रेन भी नहीं है... सब खर्च आप उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा... लगभग ५० हजार का खर्च होगा... भिजवा दीजिये काम हो जायेगा... समय बीत रहा था... मोहल्ले के बड़े-बुजुर्गों की परेशानी बढ़ रही थी... युवाओं पे दोष मढ़ा जा रहा था कि आवारागर्दी कर सकते है पर काम नहीं करवा सकते... पैसे बता दिए है तो कम से कम चंदा ही इकठ्ठा करके दे आये बिजली विभाग में... काफी सुनने के बाद एक दिन हम युवाओं ने सोंचा चलो चंदा इकठ्ठा कर लिया जाये... पहुंचे सबके घर पर बहुतों ने पैसे हमें देने से इन्कार कर दिए ये कह कर कि हम बच्चे है (जबकि हकीक़त ये थी कि वो सोंच रहे थे हम पैसे कहीं उड़ न दें)... कईं ने पैसे तो दिया पर काफी कम... लगभग २५० रुपये देने थे एक घर से... पर वो भी नहीं निकले लोगों से... पुरे दिन की मेहनत के बाद लगभग १५००० जमा हो पाए जो कि जरूरत से बहुत कम था... हमने भी कुछ नहीं किया... दो-चार दिनों के बाद रविवार था.. फिर से सब बड़ों की मीटिंग हुई... फिर वही दोषारोपण... उनका कहना था कि वही हुआ जिसका डर था... हमने पैसे ले लिए, काम नहीं किया और उड़ दिए... अब खोज हुई उन लड़कों की जिन्होंने पैसे इकट्ठे किये थे... हम पहुंचे बड़ों की मंडली में... पहुँचते ही डांट और कटु शब्दों की बारिश शुरू हो गयी... कुछ देर बर्दास्त किया और जब सहा नहीं गया तो सारे जमा किये पैसे उनके आगे डालते हुए सिर्फ इतना ही कहा "खुद कर लीजिये... आज वैसे भी रविवार है आपलोगों को समय न होने का बहाना भी नहीं करना होगा... हम लडकें तो वैसे भी नालायक है... बिजली की जरूरत आप लोगों को है... आवाज उठा सकते है आप लोग... हाँ आज की दिन की नींद और ताश की बाजी आपलोगों की छुट जाएगी इसका अफ़सोस है..." इतना कहते है ही बस एक झन्नाटेदार थप्पड़ गाल पर मिल गया... बड़ों ने खूब बुरा भला कहा पर किया कुछ नहीं... दिन वैसे ही बीत गया... अगले दिन कुछ पहुँच वाले लोगों का इस्तेमाल करना पड़ा... सत्संग के नाम पे चंदा इकठ्ठा करना पड़ा (सत्संग के नाम पे कुल १७५०० रुपये जमा हो गए थे)... पहले से १५००० थे ही...  उसके अगले दिन शाम तक ट्रांसफार्मर लग गया... पर किसी बुरा-भला कहने वाले बड़ों ने आकर धन्यवाद नहीं कहा... बस बिजली विभाग के ऑफिसर को धन्यवाद दे रहे थे, कुछ अपनी बडाई गा रहे थे... कुछ का कहना था कि वो न होते तो ट्रांसफार्मर लगता ही नहीं (पता नहीं वो एक महीने से कहाँ थे)... और आवारागर्दी करने वाले लड़के ट्रांसफार्मर को चढाने में मजदूरों की मदद कर रहे थे...

ये एक छोटा सा उदाहरण है हमारी नाकामी का... हम दोष देना जानते है पर कुछ करना नहीं जानते... अगर हमारे बड़े चाहते तो वो सब मिलकर बिजली विभाग पर दबाव बना सकते थे... उनलोगों के सुनी जाती.. पर नहीं सबको सिर्फ खुद से मतलब है... हम घर के अन्दर बैठ कर दोषारोपण तो भलीभांति कर लेते है पर अगर कुछ करने का वक़्त आये तो दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर लेते है... 

मैंने इतना लम्बा लिख दिया... पर क्या फायदा... कोई फर्क नहीं पड़ने वाला... ज्यादातर तो इसे पढेंगे नहीं... कुछ पढेंगे भी तो अधुरा... कुछ ने पूरा पढ़ भी लिया तो कमेन्ट बॉक्स में कुछ अच्छे शब्द लिख कर फिर इसे भूल जायेंगे... पर मैं लिखूंगा... जरूर लिखूंगा... मेरा किसी पे कोई अधिकार नहीं पर मेरा खुद पर पूरा अधिकार है... कोई बदले या न बदले मैं बदलूँगा... बहुत से महापुरुषों ने कई नारे दिए... एक नारा आज मैंने बुलंद किया है... "सिर्फ मैं जागूँगा... Only I get up..."

आप लोग भी जाग सकते है पर आई पी एल ख़त्म हो जाने दीजिये... वैसे स्कोर क्या हुआ है अभी???

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

तुम खुबसूरत हो.....


याद है तुम्हे?
तुमने मुझसे कहा था
तुम खुबसूरत नहीं हो
पर शायद तुम्हे मालूम नहीं
तुम इस दुनिया में सबसे खुबसूरत हो
विश्वास नहीं हो रहा न?
मैं तुम्हे तुम्हारी तस्वीर दिखाता हूँ
अपनी आँखों को देखो
उसमें तुम्हे मेरी तस्वीर नजर आ रही होगी
तुम्हे अपनी जुल्फों में
मेरा लहराना दिख रहा होगा
तुम्हारे गालों पे मेरे प्यार की चमक होगी
तुम्हारे कानों में मेरी ही आवाज
तुम्हे अपनी साँसों में
मेरी साँसों की महक महसूस होगी
अपने होंठों को देखो
मेरा नाम नजर आ रहा होगा
तुम्हारी हथेली पे मेरी किस्मत की लकीरें है
तुम्हारे पैरों में मेरी ही चाल
अपने दिल की तरफ देखो
मेरी धडकनें धड़कती महसूस होगी
अपनी आत्मा को देखो
मैं और सिर्फ मैं ही नजर आ रहा हूँ न???
क्या अब भी तुम कहोगी तुम खुबसूरत नहीं हो???

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

Codes, Rules and regulation of love

There are following Rules and regulation of love (made by SAHAR for me and trust me I can't brake these rules anyhow. There are much penalties and decorating.)

* I can never call or SMS her. She only give me call and sms then I can reply her.
* I can't meet her according to my time. She tell me the time and then I go to meet but at last moment it can be change.
* I can't talk about her with anyone, even to my friends also.
* I can't tell her name to anyone.


Now Some code for the same.

* CL = Call her
* Blank sms = She can't talk now or I don't have to call or sms her.
* DO (दो) = Have to give kiss on phone

These are secrets between Me and her. Don't disclose it.....

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